Best Motivational Story in Hindi

short hindi stories with moral values for class 8
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पिता और पुत्र

कजरापुरी गांव में रहने वाला जयराम बहुत दयालु और महा परोपकारी था कोई भी उससे कुछ मदद मांगने आता तो वह उन्हें कभी निराश नहीं करता था कुछ ना कुछ मदद देकर ही उन्हें वापस भेजता था जयराम गरीबों की तकलीफ अच्छी तरह से समझता था क्योंकि पहले वह भी गरीब था फिर उसने मेहनत करके बहुत सारा धन कमाया। उसकेे तीन बेटे थे श्रीधर विजय और बबन तीनों विवाहित थे। और तीनों के अपने-अपने अलग व्यापार थे हर कोई अपना व्यापार बड़ी दक्षता से संभालता था कुछ दिन बीत गए जयराम की उम्र हो गई थी। इसलिए जयराम अपनी इतनी बड़ी जायदाद का बंटवारा करके अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहता था।

फिर एक दिन जयराम ने अपने बचपन के दोस्त गजोधर को बुलाया और जायदाद के बंटवारे की बात अपने दोस्त गजोधर को बताइए जयराम ने कहा मैं अपनी पूरी जाएगा तीनों बेटों में बांटना चाहता हूं लेकिन मेरा यह घर जो है बस में इसका बंटवारा नहीं करना चाहता क्योंकि मेरा घर अन्नपूर्णा की तरह है हर दिन कोई ना कोई यहां मेहमान बनकर आता है और मैंने आज तक उनका आदर सम्मान करते हैं उन्हें वापस भेजा है मेरी इच्छा है कि मैं रहूं या ना रहूं इस घर में यह परंपरा बनी रहे इसलिए मै यह घर उसी को सौंपना चाहता हूं जो यह परंपरा निभाए इस पर गजोधर बोलता है अगर ऐसा हुआ तो संभव है कि भाइयों में एक दूसरों के प्रति बुराईया उत्पन्न हो सकती या भेद-भाव बढ़ जाए सोच समझकर ही निर्णय लेना उस पर जयराम कहता है पूरी जायदाद मैंने खुद कमाई इसलिए बटवारा मेरी इच्छा के अनुसार ही होगा।

लेकिन मैं यह बिल्कुल नहीं चाहता कि इस वजह से भाइयों में वैर बड़े और वह एक दूसरे को शत्रु समझे मैं तो चाहता हूं कि तीनों एक साथ इस घर में ही रहे और मिलजुल कर रहे मैं यह चाहता हूं कि जो हमारी इस परंपरा को कायम रखें उसी को यह घर दिया जाए तुम से सलाह मांगने का मेरा यही उद्देश्य है यह घर उसी को सौंपा जाए जो परोपकारी हो और अपनी जिम्मेदारियां भली-भांति निभाए इस विषय में मुझे तुम्हारी सहायता चाहिए इस तरह से जयराम ने अपने मन की बात अपने मित्र गजोधर को स्पष्ट भाषा में कर डाली गजोधर ने कहा तुम्हारे तीनों बेटे अच्छे हैं। उनमें से किसी एक को इसके लिए चुनना कठिन काम है इसको लेकर वह सोचते हुए अपने घर चला गया गजोधर के लिए अपने दोस्त जयराम की इस समस्या का समाधान करना अब परीक्षा बन गया और तीन दिनों तक सोचने के बाद उसे एक उपाय सूझा और

उसने तुरंत जयराम को यह उपाय बताया जयराम के हा कहते ही गजोधर ने उस पर काम करना शुरू कर दिया उसने पहले जयराम के बड़े बेटे श्रीधर को बुलाया और कहा बेटे तुम मेरे जिगरी दोस्त के बेटे हो मेरे बेटे जैसे हो इसलिए मैंने तुम्हें बुलाया है मेरे पास फल है जो मुझे एक महान तपस्वी गुरु ने दिया है यह फल बहुत अद्भुत है इसे खाने से तुम हमेशा स्वस्थ रहोगे और तुम्हारे पास धन की कभी भी कमी नहीं होगी मैंने एक फल अपने बेटे को खाने को दिया अब मेरे पास एक ही फल है अब मैं और तुम्हारे पिताजी तो बूढ़े हो चुके हैं अब हमें इसकी जरूरत नहीं है इसलिए मैंने सोचा मैं यह फल तुम्हें दे दु और उसे वह फल दे दिया और कहा अभी मेरे सामने ही खाओगे तो मुझे बड़ी खुशी होगी यह सुनते ही श्रीधर की आंखें खुशी से चमक उठी उसने कहाँ

मामा जी मैं आपका बहुत आभारी हूं। ऐसा कह के पूरा फल वही खा गया और खुश होकर घर चला गया इसके बाद गजोधर ने जयराम के दूसरे बेटे विजय को बुलाया और वही बात कही जो उसने श्रीधर को कही थी गजेंद्र की बात सुनकर विजय ने कहा इस फल को आप मुझे दे रहे हैं इसे देखकर मुझे बहुत खुशी हुई मामा जी पर इतना बहुमूल्य और लाभदाई फल कों में अकेले नहीं खा सकता या फल मेरे बड़े और छोटे भाई को भी दीजिए, देना है तो हम तीनों में यह फल समान बैठीए और तीनों मिलकर खाएंगे आख़िर स्वास्थ्य और धन संपत्ति सभी को चाहिए।

गजोधर ने कहा ठीक है और मुझे ऐसा कहकर वहां से चला गया अब तीसरे बेटे बबन की बारी आई गजोधर ने उसे भी फल की बात बताई गजोधर की बात सुनकर बबन को अपनी खुशी का ठीकाना न रहा उसने कहा मैं आपका दिल से आभारी हूं मामा जी पर मेरी इच्छा है गजोधर ने पूछा कहो क्या इच्छा है तुम्हारी बबन बोलता है मेरी पत्नी को भी ऐश्वर्या और स्वस्थ प्राप्त हो इससे बढ़कर मेरे लिए कोई खुशी नहीं है आप चाहो तो मैं उसे चुपचाप यहां पर ले आऊंगा हम दोनों उस पल को मिलकर खाएंगे कहिए मैं क्या करूं गजोधर ने हाँ बोलकर उसे घर भेज दिया

फिर गजोधर ने अपने मित्र जयराम को घर बुलाया और कहा घर की पूरी जिम्मेदारी तुम अपने दूसरे बेटे विजय को सौंप देना जैसी तुम्हारी इच्छा है तुम्हारे घर की परंपरा बनी रहेगी लोग तुम्हारे गुणों को हमेशा याद करेंगे और घर का मान बना रहेगा। गजोधर की बातें सुनकर जयराम ने कहा ठीक है लेकिन तुम इस निर्णय पर कैसे पहुंचे तब गजोधर ने जो हुआ वह सब जयराम को बताया गजोधर ने कहा बेशक तुम्हारे

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तीनों बेटे अच्छी ही है लेकिन तुम्हारा बड़ा बेटा श्रीधर अपने ही बारे में सोचता है दूसरे के बारे में वह सोचता ही नहीं तुम्हारा छोटा बेटा बबन अपनी पत्नी को लेकर ही सोचता है वही तक उसकी सोच व दृष्टि सीमित है वह भी दूसरों के बारे में नहीं सोचता अब रही तुम्हारे दूसरे बेटे विजय की बात वही एकमात्र है जो अपने और अपने परिवार के साथ साथ दूसरों का भी कल्याण चाहता है उसका मन सच्चा है उसकी दृष्टि विशाल है उसकी सोच सबसे अलग है उसमें तुम्हारे गुण दिखते हैं वही तुम्हारे घर का योग्य बारिश है इसलिए तुम निश्चिंत होकर अपने घर की जिम्मेदारी है उसे सौंप सकते हो इससे तुम्हारी इच्छा भी पूरी होगी और तुम्हारे घर की मर्यादा सदा बनी रहेगी और फिर गजोधर ने बताया मैंने जो फल उन्हें दिए थे वह मेरे ही घर के पेड़ के फल थे इस बात पर गजोधर और जरा एक दूसरे को दे

कर मुस्कुराए जयराम ने कहा बड़ी ही समझदारी से तुमने मेरी समस्या का समाधान किया है इसे मैं कभी नहीं भूल सकता गजोधर को आभार व्यक्त करके जयराम घर चला गया और थोड़ी दिनों बाद जयराम ने अपना व्यापार तीनों बेटों पर सौंप दिया जो वह संभाल रहे थे और अपनी जायदाद को दो हिस्सों में समान रूप से श्रीधर और बबन को बांट दिया अपना घर और घर की जिम्मेदारी जयराम ने विजय को सौंप दी इस तरह से तीनों बेटों ने पिता की इच्छा के अनुसार बंटवारा स्वीकार किया और अपने पिता की इच्छा के अनुसार चलते हुए सभी बेटों अपने पिता का नाम रोशन किया ।

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